Thursday, 6 February 2014

हल चल  सी मन  में ,
आहत सी  ज़िंदगी  में  होने  लगी थी 
एक कदम और लाइफ  बढ़ने  लगी थी। … 
 जब तेरे आने से पहले ही 
तेरे होने के एहसास  ने 
मुझे मजबूत ,कोमल  और 
और न जाने  क्या-क्या बना दिया ?
जीवन के हर रंग में ,
बसना सिखा दिया 
बस एक शब्द में ,
सारा शब्द कोष  समा  गया -माँ 
मेरे प्यार में,पुकार में,डाँट में ,दुलार में 
असीमित  प्यार  की  फुहार है !
तेरे  नन्हे कदमो  से ,
तेरे कंधो  की  ऊचाई  तक !
कोई सीमा नहीं 
मेरे आशीर्वाद और प्यार की.… 

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