Monday, 15 December 2014

कुछ करने की चाह  ने
मुझे नयी पहचान दी
            मेरी हिम्मत  तरक्की की राह  बनी
पर हर पग मुश्किल है
सच्चाई की डगर थोड़ी कठिन है
             हमने भी सोचा है कि
             अब न कदम पीछे हटेंगे
फूलों  संग जैसे होते हैं काँटे
अच्छाई  संग  होते बुराई के बंदे
               डर के यूँ  भागना
               मेरी आदत नहीं
बढ़ते है मेरे कदम बस यूँ  ही
और बढ़ते कदम,और बढ़ते कदम..

Thursday, 10 April 2014

जीवन की गुथ्थी,सुलझती नहीं 
मौत क्यों ज़िन्दगी से,डरती  नहीं । 
पल-पल का  भरोसा नहीं  यहाँ 
क्योँ  रिश्तो  की डोर उलझती रही । 
कल सामने था अपने,तो कद्र  न करी 
आज दूरी बनी  तो दिल पर लगी । 
कहीं  बीते होए कल में खो न जाना 
कि आज को पकड़ना मुश्किल हो जाये । 
आज हम यहाँ कल का क्या पता 
हो न शायद अपनी ये परछाइयाँ । 
प्यार  ही प्यार  सिर्फ जीवन सा सार हो 
तो दिलो में न यूँ  तकरार हो । 


Wednesday, 2 April 2014

ऐसे तो ज़माने का मेला लगा है
पर तन्हाई का आलम बड़ा है 
फूलों में खूशबू ,फ़िज़ा  में पुरवाई 
पर मेरा दिल देता है तेरी गवाही 
हर लम्हा लगे यूं जैसे बरसों  समान
चाहे अब बस तुम्हारा ही साथ
                     चाहत की सीमा  सब्र का बाँध
                     जुदाई के दिन बेचैनी की आँच
                      रिश्तों को और मजबूत बनती है
                      प्यार में दूरी रंग लाती है

Rishtey

रिश्तों की गहराई 
न किसी को समझ आयी 
एक जाल की  तरह कभी 
कभी आज़ाद पतंग 
कभी रेशम की  डोर  
कभी रस्सी का फंदा 
हँसना  भी दुभर 
रोना भी गुनाह 
जाने क्या चाहते है लोग 
अपनेपन  की आड़ में 
ये कैसी जलन 
उलझन है कैसी 
रिश्तों की  पहेली न सुलझे 
उम्र निकलती जा रही है 
मनाने में लोगों  को 
काश मेरे मन का भी मंथन किया होता 
स्वार्थी अपनों ने अगर प्यार समझा होता 


Sunday, 9 March 2014

Award Nite

कल रात सोने से पहले 
कुछ गुस्सा और कुछ हंसी आई 
अपने  लिए  अवार्ड और रिवॉर्ड याद आये 
     बात कुछ यूं  है कि 
     हर किसी  को उसके काम पर 
     अवार्ड दिया जाता है 
हमने भी ख्यालो  में 
"अवार्ड नाईट " सजाई 
             यूं तो अवार्ड हम  लेते नहीं 
             पर लोग हमे गलती से देते भी नहीं 
होता ऐसा है कि कभी  काम वाली बाई छुट्टी मनाये 
तो समझो हमारी शामत आई 
              एक दिन बोल कर लेती हैं मैडम छुट्टी चार 
              पूछो तो कहती है कि पैसे लीजिये काट 
उसकी जगह हमने  जो अपने  जी और जान  जलाये 
काश!  उसके लिए हमें  कोई हिम्मत का रिवॉर्ड  दिया जाये 
               पति करते ऑफिस में काम  5 -10 -15  साल 
               कंपनी देती उन्हें उनकी नौकरी का अवार्ड 
रिवॉर्ड भी मिले उन्हें
हर साल प्रमोशन ,हाईक और बोनस  साथ
जिस  बन्दे को घर से तैयार करके
नौकरी के लिए भेजे  बीवी हर दिन यार
जिसकी सेहत का पूरा  रखे ध्यान
ऑफिस कि बातें सुने और करे साथ-साथ 10  काम
                      ऐसी "unemployed employee " के लिए नहीं कोई "AWARD "
                       हर सुख दुःख कि साथी ,घर को मंदिर बनती
                       हर निर्णीय  में  सोच समझ कर जो देती साथ
                       उस नारी के लिए कोई नहीं "रिवॉर्ड "
पैदा  होने से पहले और बच्चों  के जन्म के बाद
दिया जाता केवल पतियों  और डॉक्टरों  को धन्यवाद
              अगर बच्चा जाये माँ पर
               तो दुनिया निकाले खामियां चार
                यहाँ भी अपनी बारी  नहीं आती है
                जबकि जन्म देते  समय नारी
                मौत  से लड़ कर वापिस आती है.........continue.....


Friday, 7 March 2014

उड़ने  की चाहत नहीं
आसमान किसको चाहिए
              आगे बढ़ने के लिए
               द्रढ़ता की सड़क चाहिए
विशवास  के पहियों पर
जिंदगी के रथ को
स्वाभिमान से सजा कर
प्रेम का सारथी  साथ चाहिए

उड़ने के लिए आसमान  किस को  चाहिए। …
         ज़मीन पर  ही रहकर
         तीव्र  गति  की तमन्ना  है
         शांति  और सामर्थ  की  परिपूर्णता  है
पर  ये  सफ़र  अकेले 'जीवन रथ '
से तय  नहीं होगा
शौर्य ,धेर्य ,प्रेम,विश्वास से
रास्ता आसान  होगा
           कठिन  राह  भी
           आसान  हो जाती  है
           जब किस्मत  और  मेहनत  की

           लगाम  हाथ  आती  है
बस एक सादा  जीवन  चाहिए
उड़ने  के  लिए आसमान  किस को  चाहिए। …।

Thursday, 6 February 2014

हल चल  सी मन  में ,
आहत सी  ज़िंदगी  में  होने  लगी थी 
एक कदम और लाइफ  बढ़ने  लगी थी। … 
 जब तेरे आने से पहले ही 
तेरे होने के एहसास  ने 
मुझे मजबूत ,कोमल  और 
और न जाने  क्या-क्या बना दिया ?
जीवन के हर रंग में ,
बसना सिखा दिया 
बस एक शब्द में ,
सारा शब्द कोष  समा  गया -माँ 
मेरे प्यार में,पुकार में,डाँट में ,दुलार में 
असीमित  प्यार  की  फुहार है !
तेरे  नन्हे कदमो  से ,
तेरे कंधो  की  ऊचाई  तक !
कोई सीमा नहीं 
मेरे आशीर्वाद और प्यार की.…