ऐसे तो ज़माने का मेला लगा है
पर तन्हाई का आलम बड़ा है
फूलों में खूशबू ,फ़िज़ा में पुरवाई
पर मेरा दिल देता है तेरी गवाही
हर लम्हा लगे यूं जैसे बरसों समान
चाहे अब बस तुम्हारा ही साथ
चाहत की सीमा सब्र का बाँध
जुदाई के दिन बेचैनी की आँच
रिश्तों को और मजबूत बनती है
प्यार में दूरी रंग लाती है
चाहे अब बस तुम्हारा ही साथ
चाहत की सीमा सब्र का बाँध
जुदाई के दिन बेचैनी की आँच
रिश्तों को और मजबूत बनती है
प्यार में दूरी रंग लाती है
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